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mahabharat 15.25.12: यहाँ नील के समान श्याम वर्ण वाली यह राजसी स्त्री विराजमान है, यह भीमसेन की श्रेष्ठ पत्नी है। यह उस सेनापति और राजा की बहन है, जो सदैव भगवान श्रीकृष्ण से युद्ध करने का साहस रखता था॥12॥   |   mahabharat अध्याय 15.25: संजयका ऋषियोंसे पाण्डवों, उनकी पत्नियों तथा अन्यान्य स्त्रियोंका परिचय देना   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  15.25.12 
इयं स्वसा राजचमूपतेश्च
प्रवृद्धनीलोत्पलदामवर्णा।
पस्पर्ध कृष्णेन सदा नृपो यो
वृकोदरस्यैष परिग्रहोऽग्रॺ:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
यहाँ नील के समान श्याम वर्ण वाली यह राजसी स्त्री विराजमान है, यह भीमसेन की श्रेष्ठ पत्नी है। यह उस सेनापति और राजा की बहन है, जो सदैव भगवान श्रीकृष्ण से युद्ध करने का साहस रखता था॥12॥
 
This royal lady seated here with a complexion as dark as that of indigo is the best wife of Bhimasena. She is the sister of that royal commander and king, who always had the courage to take on Lord Krishna.॥12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)