श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 25: संजयका ऋषियोंसे पाण्डवों, उनकी पत्नियों तथा अन्यान्य स्त्रियोंका परिचय देना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  15.25.10 
अस्यास्तु पार्श्वे कनकोत्तमाभा
यैषा प्रभा मूर्तिमतीव सौमी।
मध्ये स्थिता सा भगिनी द्विजाग्रॺा-
श्चक्रायुधस्याप्रतिमस्य तस्य॥ १०॥
 
 
अनुवाद
विप्रवरो! उनके आगे सुवर्ण से भी उत्तम कुण्डलों वाली देवी, जो चन्द्रमा की देवी प्रभा के समान तथा सम्पूर्ण स्त्रियों के बीच बैठी हुई हैं, वे अतुलनीय प्रभावशाली चक्रधारी भगवान श्रीकृष्ण की बहिन सुभद्रा हैं॥10॥
 
Vipravaro! Next to them, the goddess with earrings better than gold, who is sitting like the goddess Prabha of the moon and is sitting among all the women, is Subhadra, the sister of the incomparably influential discus-wielding Lord Shri Krishna. 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)