श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 24: पाण्डवों तथा पुरवासियोंका कुन्ती, गान्धारी और धृतराष्ट्रके दर्शन करना  »  श्लोक 9-11
 
 
श्लोक  15.24.9-11 
सा च बाष्पाकुलमुखी ददर्श दयितं सुतम्॥ ९॥
बाहुभ्यां सम्परिष्वज्य समुन्नाम्य च पुत्रकम्।
गान्धार्या: कथयामास सहदेवमुपस्थितम्॥ १०॥
अनन्तरं च राजानं भीमसेनमथार्जुनम्।
नकुलं च पृथा दृष्ट्वा त्वरमाणोपचक्रमे॥ ११॥
 
 
अनुवाद
जब कुन्ती ने अपने प्रिय पुत्र सहदेव को देखा, तो उनके मुख से आँसू बहने लगे। उन्होंने अपने पुत्र को दोनों हाथों से उठाकर हृदय से लगा लिया और गांधारी से बोलीं - 'बहन! सहदेव आपकी सेवा में उपस्थित हैं।' तत्पश्चात, राजा युधिष्ठिर, भीमसेन, अर्जुन और नकुल को देखकर कुन्तीदेवी बड़ी शीघ्रता से उनकी ओर चल पड़ीं।
 
When Kunti saw her beloved son Sahadeva, tears started flowing from her face. She raised her son with both her hands and hugged him and said to Gandhari – ‘Sister! Sahadeva is present in your service’. Thereafter, seeing King Yudhishthira, Bhimsen, Arjuna and Nakul, Kuntidevi started towards them in great haste. 9–11.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)