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mahabharat 15.24.8-9h: तब सभी पाण्डव अपने मामा को देखने के लिए बड़ी उत्सुकता से आगे बढ़े। बुद्धिमान सहदेव बहुत तेजी से दौड़ा और जहाँ कुन्ती थी, वहाँ पहुँचकर उसने अपनी माता के दोनों पैर पकड़ लिए और फूट-फूट कर रोने लगा।   |   mahabharat अध्याय 15.24: पाण्डवों तथा पुरवासियोंका कुन्ती, गान्धारी और धृतराष्ट्रके दर्शन करना   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 24: पाण्डवों तथा पुरवासियोंका कुन्ती, गान्धारी और धृतराष्ट्रके दर्शन करना  »  श्लोक 8-9h
 
 
श्लोक  15.24.8-9h 
ततस्ते सत्वरा जग्मु: पितुर्दर्शनकाङ्क्षिण:।
सहदेवस्तु वेगेन प्राधावद् यत्र सा पृथा॥ ८॥
सुस्वरं रुरुदे धीमान् मातु: पादावुपस्पृशन्।
 
 
अनुवाद
तब सभी पाण्डव अपने मामा को देखने के लिए बड़ी उत्सुकता से आगे बढ़े। बुद्धिमान सहदेव बहुत तेजी से दौड़ा और जहाँ कुन्ती थी, वहाँ पहुँचकर उसने अपनी माता के दोनों पैर पकड़ लिए और फूट-फूट कर रोने लगा।
 
Then all the Pandavas moved forward in great eagerness to see their uncle. Intelligent Sahadeva ran very fast and on reaching the place where Kunti was, he held both the feet of his mother and started crying profusely. 8 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)