तानपृच्छत् ततो राजा क्वासौ कौरववंशभृत्।
पिता ज्येष्ठो गतोऽस्माकमिति बाष्पपरिप्लुत:॥ ५॥
अनुवाद
उस समय राजा युधिष्ठिर ने उन सबको प्रणाम किया और नेत्रों में आँसू भरकर उनसे पूछा - 'हे मुनियों! कौरव वंश के रक्षक हमारे ज्येष्ठ पिता इस समय कहाँ चले गए हैं?'॥5॥
At that time King Yudhishthira bowed to them all and with tears in his eyes asked them - 'O sages! Where has our elder father, the protector of the Kaurava dynasty, gone at this time?'॥ 5॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥