श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 24: पाण्डवों तथा पुरवासियोंका कुन्ती, गान्धारी और धृतराष्ट्रके दर्शन करना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  15.24.13 
राजा तान् स्वरयोगेन स्पर्शेन च महामना:।
प्रत्यभिज्ञाय मेधावी समाश्वासयत प्रभु:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
महाबुद्धिमान राजा धृतराष्ट्र ने पाण्डवों को उनकी वाणी और स्पर्श से पहचान लिया और उन सबको आश्वासन दिया ॥13॥
 
The great wise King Dhritarashtra recognized the Pandavas by his voice and touch and assured them all. 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)