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श्री महाभारत
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पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व
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अध्याय 23: सेनासहित पाण्डवोंकी यात्रा और उनका कुरुक्षेत्रमें पहुँचना
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श्लोक 18
श्लोक
15.23.18
तत: प्रमुदित: सर्वो जनस्तद् वनमञ्जसा।
विवेश सुमहानादैरापूर्य भरतर्षभ॥ १८॥
अनुवाद
भारतभूषण! इससे वे सब लोग बहुत प्रसन्न हुए। वे लोग बहुत शोर मचाते हुए सहसा वन में घुस गए॥18॥
Bharatbhushan! This made all those people very happy. They entered the forest suddenly making a lot of noise.॥ 18॥
इति श्रीमहाभारते आश्रमवासिके पर्वणि आश्रमवासपर्वणि धृतराष्ट्राश्रमगमने त्रयोविंशोऽध्याय:॥ २३॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आश्रमवासिकपर्वके अन्तर्गत आश्रमवासपर्वमें युधिष्ठिर आदिका धृतराष्ट्रके आश्रमपर गमनविषयक तेईसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २३॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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