श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 23: सेनासहित पाण्डवोंकी यात्रा और उनका कुरुक्षेत्रमें पहुँचना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  15.23.17 
स ददर्शाश्रमं दूराद् राजर्षेस्तस्य धीमत:।
शतयूपस्य कौरव्य धृतराष्ट्रस्य चैव ह॥ १७॥
 
 
अनुवाद
कुरुनन्दन! वहाँ पहुँचकर उन्होंने दूर से ही मुनि शत्युप और धृतराष्ट्र का आश्रम देखा॥17॥
 
Kurunandan! Reaching there, he saw from a distance the hermitage of the wise sage Shatyup and Dhritarashtra. 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)