श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 23: सेनासहित पाण्डवोंकी यात्रा और उनका कुरुक्षेत्रमें पहुँचना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  15.23.14 
नदीतीरेषु रम्येषु सर:सु च विशाम्पते।
वासान् कृत्वा क्रमेणाथ जग्मुस्ते कुरुपुङ्गवा:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
प्रजानाथ! वे श्रेष्ठ योद्धा कुरुगण नदियों और अनेक सरोवरों के सुन्दर तटों पर डेरा डालकर आगे बढ़ते रहे॥14॥
 
Prajanath! Those Kurus, the best warriors, kept moving ahead, camping on the beautiful banks of rivers and many lakes. 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)