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mahabharat 15.23.10: माद्री के पुत्र नकुल और सहदेव भी घुड़सवारों से घिरे हुए घोड़ों पर सवार होकर तेजी से आगे बढ़ रहे थे। उनके शरीर पर कवच थे और उन्होंने अपने घोड़ों की पीठ पर ध्वजाएँ बाँध रखी थीं॥10॥   |   mahabharat अध्याय 15.23: सेनासहित पाण्डवोंकी यात्रा और उनका कुरुक्षेत्रमें पहुँचना   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 23: सेनासहित पाण्डवोंकी यात्रा और उनका कुरुक्षेत्रमें पहुँचना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  15.23.10 
माद्रीपुत्रावपि तथा हयारोहौ सुसंवृतौ।
जग्मतु: शीघ्रगमनौ संनद्धकवचध्वजौ॥ १०॥
 
 
अनुवाद
माद्री के पुत्र नकुल और सहदेव भी घुड़सवारों से घिरे हुए घोड़ों पर सवार होकर तेजी से आगे बढ़ रहे थे। उनके शरीर पर कवच थे और उन्होंने अपने घोड़ों की पीठ पर ध्वजाएँ बाँध रखी थीं॥10॥
 
Madri's sons Nakula and Sahadeva were also riding horses and moving quickly, surrounded by horsemen. They had armour on their bodies and had tied flags on the backs of their horses.॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)