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mahabharat 15.22.9: उस समय सहदेव ने राजा युधिष्ठिर को प्रणाम करके कहा, 'भैया, मैं देख रहा हूँ कि आपका हृदय तपस्या के लिए वन में जाने के लिए आतुर है - यह बड़े हर्ष की बात है।   |   mahabharat अध्याय 15.22: माताके लिये पाण्डवोंकी चिन्ता, युधिष्ठिरकी वनमें जानेकी इच्छा, सहदेव और द्रौपदीका साथ जानेका उत्साह तथा रनिवास और सेनासहित युधिष्ठिरका वनको प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 22: माताके लिये पाण्डवोंकी चिन्ता, युधिष्ठिरकी वनमें जानेकी इच्छा, सहदेव और द्रौपदीका साथ जानेका उत्साह तथा रनिवास और सेनासहित युधिष्ठिरका वनको प्रस्थान  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  15.22.9 
सहदेवस्तु राजानं प्रणिपत्येदमब्रवीत्।
अहो मे भवतो दृष्टं हृदयं गमनं प्रति॥ ९॥
 
 
अनुवाद
उस समय सहदेव ने राजा युधिष्ठिर को प्रणाम करके कहा, 'भैया, मैं देख रहा हूँ कि आपका हृदय तपस्या के लिए वन में जाने के लिए आतुर है - यह बड़े हर्ष की बात है।
 
At that time Sahadeva bowed to King Yudhishthira and said, 'Brother, I can see that your heart is eager to go to the forest of penance - this is a matter of great joy.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)