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mahabharat 15.22.8: इस प्रकार बातें करते-करते उसका मन बहुत व्याकुल हो गया और उसने वन में जाकर धृतराष्ट्र से मिलने का निश्चय किया।   |   mahabharat अध्याय 15.22: माताके लिये पाण्डवोंकी चिन्ता, युधिष्ठिरकी वनमें जानेकी इच्छा, सहदेव और द्रौपदीका साथ जानेका उत्साह तथा रनिवास और सेनासहित युधिष्ठिरका वनको प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 22: माताके लिये पाण्डवोंकी चिन्ता, युधिष्ठिरकी वनमें जानेकी इच्छा, सहदेव और द्रौपदीका साथ जानेका उत्साह तथा रनिवास और सेनासहित युधिष्ठिरका वनको प्रस्थान  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  15.22.8 
एवं तेषां कथयतामौत्सुक्यमभवत् तदा।
गमने चाभवद् बुद्धिर्धृतराष्ट्रदिदृक्षया॥ ८॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार बातें करते-करते उसका मन बहुत व्याकुल हो गया और उसने वन में जाकर धृतराष्ट्र से मिलने का निश्चय किया।
 
While he was talking in this manner, his mind became very anxious and he decided to go to the forest to see Dhritarashtra.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)