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mahabharat 15.22.6: आश्रयहीन और पुत्रहीन राजा धृतराष्ट्र हिंसक पशुओं से भरे उस वन में अपनी पत्नी के साथ अकेले कैसे रहते होंगे?॥6॥   |   mahabharat अध्याय 15.22: माताके लिये पाण्डवोंकी चिन्ता, युधिष्ठिरकी वनमें जानेकी इच्छा, सहदेव और द्रौपदीका साथ जानेका उत्साह तथा रनिवास और सेनासहित युधिष्ठिरका वनको प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 22: माताके लिये पाण्डवोंकी चिन्ता, युधिष्ठिरकी वनमें जानेकी इच्छा, सहदेव और द्रौपदीका साथ जानेका उत्साह तथा रनिवास और सेनासहित युधिष्ठिरका वनको प्रस्थान  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  15.22.6 
कथं च स महीपालो हतपुत्रो निराश्रय:।
पत्न्या सह वसत्येको वने श्वापदसेविते॥ ६॥
 
 
अनुवाद
आश्रयहीन और पुत्रहीन राजा धृतराष्ट्र हिंसक पशुओं से भरे उस वन में अपनी पत्नी के साथ अकेले कैसे रहते होंगे?॥6॥
 
How would King Dhritarashtra, without shelter and without a son, live alone with his wife in that forest infested with predatory animals?॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)