Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 15.22.5: तत्पश्चात एक दिन पांडव अपनी माता के विषय में इस प्रकार चिंता करने लगे - 'हाय! मेरी माता कुंती तो बहुत दुबली हो गई होंगी। वे उन वृद्ध दम्पति गांधारी और धृतराष्ट्र की सेवा कैसे करती होंगी?' | mahabharat अध्याय 15.22: माताके लिये पाण्डवोंकी चिन्ता, युधिष्ठिरकी वनमें जानेकी इच्छा, सहदेव और द्रौपदीका साथ जानेका उत्साह तथा रनिवास और सेनासहित युधिष्ठिरका वनको प्रस्थान । mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अचिन्तयंश्च जननीं ततस्ते पाण्डुनन्दना:।
कथं नु वृद्धमिथुनं वहत्यतिकृशा पृथा॥ ५॥
अनुवाद
तत्पश्चात एक दिन पांडव अपनी माता के विषय में इस प्रकार चिंता करने लगे - 'हाय! मेरी माता कुंती तो बहुत दुबली हो गई होंगी। वे उन वृद्ध दम्पति गांधारी और धृतराष्ट्र की सेवा कैसे करती होंगी?'
Thereafter one day the Pandavas started worrying about their mother in this way - 'Alas! My mother Kunti must have become very thin. How would she be serving those old couple Gandhari and Dhritarashtra?
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥