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mahabharat 15.22.4: उन दिनों समुद्र के समान गम्भीर वीर पाण्डव शोक के कारण मूर्च्छित होकर मूर्छित हो गए थे॥4॥   |   mahabharat अध्याय 15.22: माताके लिये पाण्डवोंकी चिन्ता, युधिष्ठिरकी वनमें जानेकी इच्छा, सहदेव और द्रौपदीका साथ जानेका उत्साह तथा रनिवास और सेनासहित युधिष्ठिरका वनको प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 22: माताके लिये पाण्डवोंकी चिन्ता, युधिष्ठिरकी वनमें जानेकी इच्छा, सहदेव और द्रौपदीका साथ जानेका उत्साह तथा रनिवास और सेनासहित युधिष्ठिरका वनको प्रस्थान  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  15.22.4 
ते स्म वीरा दुराधर्षा गाम्भीर्ये सागरोपमा:।
शोकोपहतविज्ञाना नष्टसंज्ञा इवाभवन्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
उन दिनों समुद्र के समान गम्भीर वीर पाण्डव शोक के कारण मूर्च्छित होकर मूर्छित हो गए थे॥4॥
 
In those days, the brave Pandavas, who were as serious as the ocean, had become unconscious due to loss of consciousness due to grief. 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)