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mahabharat 15.22.21: आवश्यक वस्तुओं से लदी हुई गाड़ियाँ, बाजार, दुकानें, कोष, कारीगर और कोषाध्यक्ष - ये सभी कुरुक्षेत्र के आश्रम की ओर चलें ॥ 21॥   |   mahabharat अध्याय 15.22: माताके लिये पाण्डवोंकी चिन्ता, युधिष्ठिरकी वनमें जानेकी इच्छा, सहदेव और द्रौपदीका साथ जानेका उत्साह तथा रनिवास और सेनासहित युधिष्ठिरका वनको प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 22: माताके लिये पाण्डवोंकी चिन्ता, युधिष्ठिरकी वनमें जानेकी इच्छा, सहदेव और द्रौपदीका साथ जानेका उत्साह तथा रनिवास और सेनासहित युधिष्ठिरका वनको प्रस्थान  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  15.22.21 
शकटापणवेशाश्च कोश: शिल्पिन एव च।
निर्यान्तु कोषपालाश्च कुरुक्षेत्राश्रमं प्रति॥ २१॥
 
 
अनुवाद
आवश्यक वस्तुओं से लदी हुई गाड़ियाँ, बाजार, दुकानें, कोष, कारीगर और कोषाध्यक्ष - ये सभी कुरुक्षेत्र के आश्रम की ओर चलें ॥ 21॥
 
‘The carts laden with essential goods, the markets, the shops, the treasury, the artisans and the treasurers – all of them should proceed towards the hermitage at Kurukshetra.॥ 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)