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mahabharat 15.22.18: भारतभूषण! द्रौपदी देवी के ऐसा कहने पर राजा युधिष्ठिर ने सब सेनापतियों को बुलाकर कहा-॥18॥   |   mahabharat अध्याय 15.22: माताके लिये पाण्डवोंकी चिन्ता, युधिष्ठिरकी वनमें जानेकी इच्छा, सहदेव और द्रौपदीका साथ जानेका उत्साह तथा रनिवास और सेनासहित युधिष्ठिरका वनको प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 22: माताके लिये पाण्डवोंकी चिन्ता, युधिष्ठिरकी वनमें जानेकी इच्छा, सहदेव और द्रौपदीका साथ जानेका उत्साह तथा रनिवास और सेनासहित युधिष्ठिरका वनको प्रस्थान  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  15.22.18 
इत्युक्त: स नृपो देव्या द्रौपद्या भरतर्षभ।
सेनाध्यक्षान् समानाय्य सर्वानिदमुवाच ह॥ १८॥
 
 
अनुवाद
भारतभूषण! द्रौपदी देवी के ऐसा कहने पर राजा युधिष्ठिर ने सब सेनापतियों को बुलाकर कहा-॥18॥
 
Bharatbhushan! When Draupadi Devi said this, King Yudhishthira called all the army chiefs and said -॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)