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mahabharat 15.22.17: 'राजन्! आपको मालूम होना चाहिए कि हरम की सभी बहुएँ वन जाने के लिए पैर फैलाए खड़ी हैं। वे सभी कुन्ती, गांधारी और ससुरजी को देखना चाहती हैं।॥17॥   |   mahabharat अध्याय 15.22: माताके लिये पाण्डवोंकी चिन्ता, युधिष्ठिरकी वनमें जानेकी इच्छा, सहदेव और द्रौपदीका साथ जानेका उत्साह तथा रनिवास और सेनासहित युधिष्ठिरका वनको प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 22: माताके लिये पाण्डवोंकी चिन्ता, युधिष्ठिरकी वनमें जानेकी इच्छा, सहदेव और द्रौपदीका साथ जानेका उत्साह तथा रनिवास और सेनासहित युधिष्ठिरका वनको प्रस्थान  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  15.22.17 
अग्रपादस्थितं चेमं विद्धि राजन् वधूजनम्।
काङ्क्षन्तं दर्शनं कुन्त्या गान्धार्या: श्वशुरस्य च॥ १७॥
 
 
अनुवाद
'राजन्! आपको मालूम होना चाहिए कि हरम की सभी बहुएँ वन जाने के लिए पैर फैलाए खड़ी हैं। वे सभी कुन्ती, गांधारी और ससुरजी को देखना चाहती हैं।॥17॥
 
‘King! You should know that all the daughters-in-law of the harem are standing with their feet stretched forward to go to the forest. All of them want to see Kunti, Gandhari and father-in-law.॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)