Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 15.22.16: ‘राजेन्द्र! तुम्हारी बुद्धि सदैव ऐसी ही बनी रहे। तुम्हारा मन सदैव धर्म में तल्लीन रहे; क्योंकि आज तुम हमें माता कुन्ती का दर्शन कराकर परम कल्याण का साथी बनाओगे।॥16॥ | mahabharat अध्याय 15.22: माताके लिये पाण्डवोंकी चिन्ता, युधिष्ठिरकी वनमें जानेकी इच्छा, सहदेव और द्रौपदीका साथ जानेका उत्साह तथा रनिवास और सेनासहित युधिष्ठिरका वनको प्रस्थान । mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
‘राजेन्द्र! तुम्हारी बुद्धि सदैव ऐसी ही बनी रहे। तुम्हारा मन सदैव धर्म में तल्लीन रहे; क्योंकि आज तुम हमें माता कुन्ती का दर्शन कराकर परम कल्याण का साथी बनाओगे।॥16॥
‘Rajendra! May your wisdom always remain like this. May your mind always be absorbed in religion; because today you will make us the companions of supreme welfare by showing us mother Kunti.॥ 16॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥