Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 15.22.13: भरतश्रेष्ठ! मनुष्यों के प्रसंग तो अनित्य हैं; उनमें पड़कर राजकुमारी कुन्ती सुखों से वंचित होकर वन में निवास करती है।॥13॥ | mahabharat अध्याय 15.22: माताके लिये पाण्डवोंकी चिन्ता, युधिष्ठिरकी वनमें जानेकी इच्छा, सहदेव और द्रौपदीका साथ जानेका उत्साह तथा रनिवास और सेनासहित युधिष्ठिरका वनको प्रस्थान । mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
भरतश्रेष्ठ! मनुष्यों के प्रसंग तो अनित्य हैं; उनमें पड़कर राजकुमारी कुन्ती सुखों से वंचित होकर वन में निवास करती है।॥13॥
Best of the Bharatas! The events of human beings are certainly temporary; falling into them, Princess Kunti is deprived of the pleasures and has to live in the forest.'॥ 13॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥