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श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 21: धृतराष्ट्र आदिके लिये पाण्डवों तथा पुरवासियोंकी चिन्ता  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  15.21.8 
पाण्डवाश्चैव ते सर्वे भृशं शोकपरायणा:।
शोचन्तो मातरं वृद्धामूषुर्नातिचिरं पुरे॥ ८॥
 
 
अनुवाद
सभी पांडव अत्यंत दुःख में डूबे हुए थे। वे अपनी वृद्ध माता के लिए इतने चिंतित हो गए कि वे अधिक समय तक नगर में नहीं रुक सके।
 
All the Pandavas were constantly immersed in extreme grief. They became so worried for their old mother that they could not stay in the city for long. 8.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)