अभिमन्योश्च बालस्य विनाशं रणमूर्धनि।
कर्णस्य च महाबाहो संग्रामेष्वपलायिन:॥ १२॥
अनुवाद
हे महाबाहु जनमेजय! युद्ध के मुहाने पर बालक अभिमन्यु का अन्यायपूर्वक विनाश, युद्ध में पीठ न दिखाने वाले कर्ण का (पहचान के अभाव में) वध - इन घटनाओं का स्मरण करके वे व्याकुल हो जाते हैं। ॥12॥
Mighty-armed Janamejaya! The unjust destruction of the child Abhimanyu at the mouth of the battle, the killing of Karna who never turned his back in a battle (due to lack of identification) - remembering these incidents would make him restless. ॥12॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥