श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 20: नारदजीका प्राचीन राजर्षियोंकी तप:सिद्धिका दृष्टान्त देकर धृतराष्ट्रकी तपस्याविषयक श्रद्धाको बढ़ाना तथा शतयूपके पूछनेपर धृतराष्ट्रको मिलनेवाली गतिका भी वर्णन करना  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  15.20.32 
तत्राहमिदमश्रौषं शक्रस्य वदत: स्वयम्।
वर्षाणि त्रीणि शिष्टानि राज्ञोऽस्य परमायुष:॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
उस सभा में मैंने स्वयं इन्द्र से सुना कि राजा धृतराष्ट्र की आयु पूरी होने में केवल तीन वर्ष शेष हैं ॥ 32॥
 
In that assembly I heard from Indra himself that only three years remain for King Dhritarashtra to complete his lifespan. ॥ 32॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)