नारदजी बोले - राजर्षे ! एक दिन भगवान की इच्छा से मैं विचरण करता हुआ इन्द्रलोक में गया और वहाँ शचीपति इन्द्र से मेरी भेंट हुई । वहाँ मैंने राजा पाण्डुको के भी दर्शन किये ॥30॥
Naradji said – Rajarshe! One day, by the will of God, I went to Indralok while wandering and there I met Sachipati Indra. There I also saw King Panduko. 30॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥