श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 20: नारदजीका प्राचीन राजर्षियोंकी तप:सिद्धिका दृष्टान्त देकर धृतराष्ट्रकी तपस्याविषयक श्रद्धाको बढ़ाना तथा शतयूपके पूछनेपर धृतराष्ट्रको मिलनेवाली गतिका भी वर्णन करना  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  15.20.29 
इत्युक्तो नारदस्तेन वाक्यं सर्वमनोऽनुगम्।
व्याजहार सभामध्ये दिव्यदर्शी महातपा:॥ २९॥
 
 
अनुवाद
शतयुप के यह प्रश्न पूछने पर दिव्य दृष्टि वाले महातपस्वी नारद मुनि ने सभा में यह वचन कहे, जो सबके हृदय को प्रसन्न करने वाले थे।
 
When Shatayup asked this question, the divine-sighted great ascetic sage Narada said the following words in the assembly which was pleasing to everyone's hearts.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)