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mahabharat 15.20.28: ‘प्रभु! मैं आपसे यह भी सुनना चाहता हूँ कि इस राजा को कौन-सा पद मिलेगा। वह पद कैसा होगा और कब मिलेगा - कृपया मुझे ठीक-ठीक बताइए।’॥28॥   |   mahabharat अध्याय 15.20: नारदजीका प्राचीन राजर्षियोंकी तप:सिद्धिका दृष्टान्त देकर धृतराष्ट्रकी तपस्याविषयक श्रद्धाको बढ़ाना तथा शतयूपके पूछनेपर धृतराष्ट्रको मिलनेवाली गतिका भी वर्णन करना   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 20: नारदजीका प्राचीन राजर्षियोंकी तप:सिद्धिका दृष्टान्त देकर धृतराष्ट्रकी तपस्याविषयक श्रद्धाको बढ़ाना तथा शतयूपके पूछनेपर धृतराष्ट्रको मिलनेवाली गतिका भी वर्णन करना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  15.20.28 
स्थानमप्यस्य नृपते: श्रोतुमिच्छाम्यहं विभो।
त्वत्त: कीदृक् कदा चेति तन्ममाख्याहि तत्त्वत:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
‘प्रभु! मैं आपसे यह भी सुनना चाहता हूँ कि इस राजा को कौन-सा पद मिलेगा। वह पद कैसा होगा और कब मिलेगा - कृपया मुझे ठीक-ठीक बताइए।’॥28॥
 
‘Prabhu! I also want to hear from you about the position this king is going to get. What kind of position it will be and when will he get it – please tell me exactly.’॥ 28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)