श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 20: नारदजीका प्राचीन राजर्षियोंकी तप:सिद्धिका दृष्टान्त देकर धृतराष्ट्रकी तपस्याविषयक श्रद्धाको बढ़ाना तथा शतयूपके पूछनेपर धृतराष्ट्रको मिलनेवाली गतिका भी वर्णन करना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  15.20.26 
सर्ववृत्तान्ततत्त्वज्ञो भवान् दिव्येन चक्षुषा।
युक्त: पश्यसि विप्रर्षे गतिर्या विविधा नृणाम्॥ २६॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्मर्षे! आप समस्त कथाओं के तत्त्वज्ञ हैं। आप अपनी दिव्य दृष्टि से योगयुक्त होकर मनुष्यों को प्राप्त होने वाली नाना प्रकार की गतियों को प्रत्यक्ष देखते हैं। 26॥
 
Brahmarshe! You are the philosopher of all stories. With your divine vision, you, being yogic, directly see the various types of movements that human beings attain. 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)