श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 20: नारदजीका प्राचीन राजर्षियोंकी तप:सिद्धिका दृष्टान्त देकर धृतराष्ट्रकी तपस्याविषयक श्रद्धाको बढ़ाना तथा शतयूपके पूछनेपर धृतराष्ट्रको मिलनेवाली गतिका भी वर्णन करना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  15.20.24 
अहो भगवता श्रद्धा कुरुराजस्य वर्धिता।
सर्वस्य च जनस्यास्य मम चैव महाद्युते॥ २४॥
 
 
अनुवाद
हे देवों के महामुनि! यह बड़े हर्ष की बात है कि आपने कुरुराज धृतराष्ट्र, यहाँ आये हुए समस्त लोगों तथा मेरी भी तपस्या के विषय में भक्ति को बहुत बढ़ा दिया है॥ 24॥
 
O mighty sage of gods! It is a matter of great joy that you have greatly increased the devotion of the Kuru King Dhritarashtra, of all the people who have come here and of me as well regarding penance.॥ 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)