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श्री महाभारत
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पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व
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अध्याय 20: नारदजीका प्राचीन राजर्षियोंकी तप:सिद्धिका दृष्टान्त देकर धृतराष्ट्रकी तपस्याविषयक श्रद्धाको बढ़ाना तथा शतयूपके पूछनेपर धृतराष्ट्रको मिलनेवाली गतिका भी वर्णन करना
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श्लोक 23
श्लोक
15.20.23
नारदस्य तु तद् वाक्यं शशंसुर्द्विजसत्तमा:।
शतयूपस्तु राजर्षिर्नारदं वाक्यमब्रवीत्॥ २३॥
अनुवाद
उन सभी श्रेष्ठ ब्राह्मणों ने नारदजी के उपर्युक्त वचनों की बहुत प्रशंसा की। तत्पश्चात राजर्षि शत्युप ने नारदजी से इस प्रकार कहा -॥23॥
All those great Brahmins greatly praised the above words of Naradji. After that Rajarshi Shatyupa said to Naradji thus -॥ 23॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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