श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 20: नारदजीका प्राचीन राजर्षियोंकी तप:सिद्धिका दृष्टान्त देकर धृतराष्ट्रकी तपस्याविषयक श्रद्धाको बढ़ाना तथा शतयूपके पूछनेपर धृतराष्ट्रको मिलनेवाली गतिका भी वर्णन करना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  15.20.22 
तत: सर्वे नारदं विप्रसंघा:
सम्पूजयामासुरतीव राजन्।
राज्ञ: प्रीत्या धृतराष्ट्रस्य ते वै
पुन: पुन: सम्प्रहृष्टास्तदानीम्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
राजा! तत्पश्चात समस्त ब्राह्मण समुदाय ने नारदजी की विशेष पूजा की। उस समय वे सभी लोग राजा धृतराष्ट्र की प्रसन्नता पर बार-बार हर्षित हो रहे थे।
 
King! Thereafter the entire Brahmin community performed special worship of Naradji. At that time all of them were repeatedly rejoicing at the happiness of King Dhritarashtra.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)