श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 20: नारदजीका प्राचीन राजर्षियोंकी तप:सिद्धिका दृष्टान्त देकर धृतराष्ट्रकी तपस्याविषयक श्रद्धाको बढ़ाना तथा शतयूपके पूछनेपर धृतराष्ट्रको मिलनेवाली गतिका भी वर्णन करना  »  श्लोक 19-20
 
 
श्लोक  15.20.19-20 
वयमेतत् प्रपश्यामो नृपते दिव्यचक्षुषा॥ १९॥
प्रवेक्ष्यति महात्मानं विदुरश्च युधिष्ठिरम्।
संजयस्तदनुध्यानादित: स्वर्गमवाप्स्यति॥ २०॥
 
 
अनुवाद
हे मनुष्यों के स्वामी! हम अपनी दिव्य दृष्टि से यह सब देख रहे हैं। विदुर महापुरुष युधिष्ठिर के शरीर में प्रवेश करेंगे और संजय उनका चिंतन करते हुए यहीं से सीधे स्वर्ग को चले जायेंगे।
 
O Lord of men! We are seeing all this with our divine sight. Vidura will enter the body of the great soul Yudhishthira and Sanjaya will go straight to heaven from here because of thinking about him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)