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mahabharat 15.20.17: महाराज! आपके छोटे भाई पाण्डु इन्द्र के साथ रहते हैं। वे सदैव आपका स्मरण करते हैं। वे अवश्य ही आपका कल्याण करेंगे।॥17॥   |   mahabharat अध्याय 15.20: नारदजीका प्राचीन राजर्षियोंकी तप:सिद्धिका दृष्टान्त देकर धृतराष्ट्रकी तपस्याविषयक श्रद्धाको बढ़ाना तथा शतयूपके पूछनेपर धृतराष्ट्रको मिलनेवाली गतिका भी वर्णन करना   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 20: नारदजीका प्राचीन राजर्षियोंकी तप:सिद्धिका दृष्टान्त देकर धृतराष्ट्रकी तपस्याविषयक श्रद्धाको बढ़ाना तथा शतयूपके पूछनेपर धृतराष्ट्रको मिलनेवाली गतिका भी वर्णन करना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  15.20.17 
पाण्डु: स्मरति ते नित्यं बलहन्तु: समीपग:।
त्वां सदैव महाराज श्रेयसा स च योक्ष्यति॥ १७॥
 
 
अनुवाद
महाराज! आपके छोटे भाई पाण्डु इन्द्र के साथ रहते हैं। वे सदैव आपका स्मरण करते हैं। वे अवश्य ही आपका कल्याण करेंगे।॥17॥
 
Maharaj! Your younger brother Pandu lives with Indra. He always remembers you. He will surely make you a part of welfare. ॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)