श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 20: नारदजीका प्राचीन राजर्षियोंकी तप:सिद्धिका दृष्टान्त देकर धृतराष्ट्रकी तपस्याविषयक श्रद्धाको बढ़ाना तथा शतयूपके पूछनेपर धृतराष्ट्रको मिलनेवाली गतिका भी वर्णन करना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  15.20.16 
त्वं चापि राजशार्दूल तपसोऽन्ते श्रिया वृत:।
गान्धारीसहितो गन्ता गतिं तेषां महात्मनाम्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
श्रेष्ठ! अपनी तपस्या के अंत में तुम भी यश से परिपूर्ण होगे और गांधारी के साथ उन्हीं महात्माओं की गति को प्राप्त करोगे॥16॥
 
The best! At the end of your penance, you too will be filled with glory and along with Gandhari, you will attain the speed of the same Mahatmas. 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)