श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 20: नारदजीका प्राचीन राजर्षियोंकी तप:सिद्धिका दृष्टान्त देकर धृतराष्ट्रकी तपस्याविषयक श्रद्धाको बढ़ाना तथा शतयूपके पूछनेपर धृतराष्ट्रको मिलनेवाली गतिका भी वर्णन करना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  15.20.14 
शशलोमा च राजाऽऽसीद् राजन् परमधार्मिक:।
सम्यगस्मिन् वने तप्त्वा ततो दिवमवाप्तवान्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! परम पुण्यात्मा राजा शशलोमा ने भी इसी वन में घोर तपस्या की थी और स्वर्ग प्राप्त किया था।
 
O King! The most pious king Shashloma also performed great penance in this forest and attained heaven. 14.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)