Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 15.2.8-9h: उन्हें सदैव यह चिंता रहती थी कि अपने पुत्रों और पौत्रों की मृत्यु से दुःखी वृद्ध राजा धृतराष्ट्र कहीं हमसे दुःखी होकर प्राण न त्याग दें। | mahabharat अध्याय 15.2: पाण्डवोंका धृतराष्ट्र और गान्धारीके अनुकूल बर्ताव । mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कथं नु राजा वृद्ध: स पुत्रपौत्रवधार्दित:॥ ८॥
शोकमस्मत्कृतं प्राप्य न म्रियेतेति चिन्त्यते।
अनुवाद
उन्हें सदैव यह चिंता रहती थी कि अपने पुत्रों और पौत्रों की मृत्यु से दुःखी वृद्ध राजा धृतराष्ट्र कहीं हमसे दुःखी होकर प्राण न त्याग दें।
He was always worried that the old King Dhritarashtra, who was pained by the death of his sons and grandsons, might give up his life after being grieved by us. 8 1/2
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥