Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 15.2.6-8h: इसके बाद महामना कुरुकुलनंदन राजा धृतराष्ट्र उक्त अवसरों पर योग्य ब्राह्मणों को प्रचुर धन दान करते थे। धर्मराज युधिष्ठिर, भीमसेन, सव्यसाची अर्जुन तथा नकुल-सहदेव भी उन्हें प्रसन्न करने की इच्छा से उनके सभी कार्यों में उनका सहयोग करते थे। | mahabharat अध्याय 15.2: पाण्डवोंका धृतराष्ट्र और गान्धारीके अनुकूल बर्ताव । mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तत: स राजा कौरव्यो धृतराष्ट्रो महामना:॥ ६॥
ब्राह्मणेभ्यो यथार्हेभ्यो ददौ वित्तान्यनेकश:।
धर्मराजश्च भीमश्च सव्यसाची यमावपि॥ ७॥
तत् सर्वमन्ववर्तन्त तस्य प्रियचिकीर्षया।
अनुवाद
इसके बाद महामना कुरुकुलनंदन राजा धृतराष्ट्र उक्त अवसरों पर योग्य ब्राह्मणों को प्रचुर धन दान करते थे। धर्मराज युधिष्ठिर, भीमसेन, सव्यसाची अर्जुन तथा नकुल-सहदेव भी उन्हें प्रसन्न करने की इच्छा से उनके सभी कार्यों में उनका सहयोग करते थे।
Thereafter, Mahamana Kurukulanandan King Dhritarashtra used to donate abundant wealth to the deserving Brahmins on the said occasions. Dharmaraja Yudhishthir, Bhimsen, Savyasachi Arjun and Nakul-Sahdev also supported him in all his works with the desire to please him.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥