धर्मपुत्र राजा युधिष्ठिर को धृतराष्ट्र के प्रति अनुकूल व्यवहार करते देख स्वयं शत्रुसूदन कुरुनन्दन भीमसेन ने ऊपर से तो उनका अनुसरण किया, तथापि उनका हृदय धृतराष्ट्र के प्रति विमुख ही रहा। 30॥
Seeing Dharmaputra King Yudhishthira behaving in a favorable manner towards Dhritarashtra, Shatrusudan Kurunandan Bhimsen himself superficially followed him, however, his heart remained averse to Dhritarashtra. 30॥
इति श्रीमहाभारते आश्रमवासिके पर्वणि आश्रमवासपर्वणि द्वितीयोऽध्याय:॥ २॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आश्रमवासिकपर्वके अन्तर्गत आश्रमवासपर्वमें दूसरा अध्याय पूरा हुआ॥ २॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥