Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 15.2.16-17h: सुबल की पुत्री गांधारी ने भी अपने पुत्रों के लिए शोक त्याग दिया और पांडवों को सदैव अपने पुत्रों के समान प्रेम किया।   |   mahabharat अध्याय 15.2: पाण्डवोंका धृतराष्ट्र और गान्धारीके अनुकूल बर्ताव   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 2: पाण्डवोंका धृतराष्ट्र और गान्धारीके अनुकूल बर्ताव  »  श्लोक 16-17h
 
 
श्लोक  15.2.16-17h 
सौबलेयी च गान्धारी पुत्रशोकमपास्य तम्॥ १६॥
सदैव प्रीतिमत्यासीत् तनयेषु निजेष्विव।
 
 
अनुवाद
सुबल की पुत्री गांधारी ने भी अपने पुत्रों के लिए शोक त्याग दिया और पांडवों को सदैव अपने पुत्रों के समान प्रेम किया।
 
Gandhari, the daughter of Subala, too, left aside the grief for her own sons and always loved the Pandavas like her own sons. 16 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)