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mahabharat 15.19.8: इस प्रकार वृद्ध राजा धृतराष्ट्र नित्यकर्म से निवृत्त होकर और अपनी इन्द्रियों को वश में करके नियमों का पालन करते हुए सेवकों के साथ गंगा तट से चलकर कुरुक्षेत्र पहुँचे॥8॥   |   mahabharat अध्याय 15.19: धृतराष्ट्र आदिका गङ्गातटपर निवास करके वहाँसे कुरुक्षेत्रमें जाना और शतयूपके आश्रमपर निवास करना   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 19: धृतराष्ट्र आदिका गङ्गातटपर निवास करके वहाँसे कुरुक्षेत्रमें जाना और शतयूपके आश्रमपर निवास करना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  15.19.8 
ततो भागीरथीतीरात् कुरुक्षेत्रं जगाम स:।
सानुगो नृपतिर्वृद्धो नियत: संयतेन्द्रिय:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार वृद्ध राजा धृतराष्ट्र नित्यकर्म से निवृत्त होकर और अपनी इन्द्रियों को वश में करके नियमों का पालन करते हुए सेवकों के साथ गंगा तट से चलकर कुरुक्षेत्र पहुँचे॥8॥
 
In this way, the old king Dhritarashtra, retired from his daily routine and following the rules with full control over his senses, walked from the banks of Ganga along with his servants and reached Kurukshetra. 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)