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mahabharat 15.19.15: महाराज! इसी प्रकार छाल और मृगचर्म धारण करने वाली देवी गांधारी भी कुन्ती के साथ रहकर धृतराष्ट्र के समान व्रत का पालन करने लगीं॥15॥   |   mahabharat अध्याय 15.19: धृतराष्ट्र आदिका गङ्गातटपर निवास करके वहाँसे कुरुक्षेत्रमें जाना और शतयूपके आश्रमपर निवास करना   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  15.19.15 
तथैव देवी गान्धारी वल्कलाजिनधारिणी।
कुन्त्या सह महाराज समानव्रतचारिणी॥ १५॥
 
 
अनुवाद
महाराज! इसी प्रकार छाल और मृगचर्म धारण करने वाली देवी गांधारी भी कुन्ती के साथ रहकर धृतराष्ट्र के समान व्रत का पालन करने लगीं॥15॥
 
Maharaj! Similarly, Goddess Gandhari, who wore bark and deerskin, also stayed with Kunti and started observing the fast like Dhritarashtra.॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)