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mahabharat 15.19.1: वैशम्पायन कहते हैं, 'हे जनमेजय! दूसरा दिन बीत जाने पर राजा धृतराष्ट्र ने विदुर की सलाह मान ली और भागीरथी के पवित्र तट पर रहने लगे, जो पुण्यात्मा पुरुषों के रहने के लिए उपयुक्त स्थान है।   |   mahabharat अध्याय 15.19: धृतराष्ट्र आदिका गङ्गातटपर निवास करके वहाँसे कुरुक्षेत्रमें जाना और शतयूपके आश्रमपर निवास करना   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  15.19.1 
वैशम्पायन उवाच
ततो भागीरथीतीरे मेध्ये पुण्यजनोचिते।
निवासमकरोद् राजा विदुरस्य मते स्थित:॥ १॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायन कहते हैं, 'हे जनमेजय! दूसरा दिन बीत जाने पर राजा धृतराष्ट्र ने विदुर की सलाह मान ली और भागीरथी के पवित्र तट पर रहने लगे, जो पुण्यात्मा पुरुषों के रहने के लिए उपयुक्त स्थान है।
 
Vaishmpayana says, 'O Janamejaya! After the second day had passed, King Dhritarashtra accepted Vidur's advice and lived on the holy banks of the Bhagirathi, a place suitable for pious men to live in.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)