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श्लोक  15.18.7 
राज्यस्थया तपस्तप्तुं कर्तुं दानव्रतं महत्।
अनया शक्यमेवाद्य श्रूयतां च वचो मम॥ ७॥
 
 
अनुवाद
वह राज्य में रहते हुए भी तप कर सकती है और महान दान-व्रत करने में समर्थ हो सकती है; इसलिए उसे आज मेरी बात ध्यानपूर्वक सुननी चाहिए।
 
She can perform austerities even while living in the kingdom and can be capable of performing a great charity-vow; therefore she should listen to me carefully today. 7.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)