Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 15.18.23-24: फिर जब रात्रि बीत गई, तब प्रातःकाल के कर्मकाण्ड पूर्ण करके तथा विधिपूर्वक अग्नि में आहुति देकर वे सब लोग धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगे। उन सबने रात्रि में उपवास किया था और उत्तर दिशा की ओर मुख करके आगे बढ़ रहे थे॥ 23-24॥   |   mahabharat अध्याय 15.18: पाण्डवोंका स्त्रियोंसहित निराश लौटना, कुन्तीसहित गान्धारी और धृतराष्ट्र आदिका मार्गमें गंगातटपर निवास करना   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 18: पाण्डवोंका स्त्रियोंसहित निराश लौटना, कुन्तीसहित गान्धारी और धृतराष्ट्र आदिका मार्गमें गंगातटपर निवास करना  »  श्लोक 23-24
 
 
श्लोक  15.18.23-24 
ततो रात्र्यां व्यतीतायां कृतपूर्वाह्णिकक्रिया:॥ २३॥
हुत्वाग्निं विधिवत् सर्वे प्रययुस्ते यथाक्रमम्।
उदङ्मुखा निरीक्षन्त उपवासपरायणा:॥ २४॥
 
 
अनुवाद
फिर जब रात्रि बीत गई, तब प्रातःकाल के कर्मकाण्ड पूर्ण करके तथा विधिपूर्वक अग्नि में आहुति देकर वे सब लोग धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगे। उन सबने रात्रि में उपवास किया था और उत्तर दिशा की ओर मुख करके आगे बढ़ रहे थे॥ 23-24॥
 
Then, when the night passed, after completing the morning rituals and offering oblations in the fire as per the rituals, all of them started moving forward gradually. All of them had fasted during the night and were moving forward facing the north direction.॥ 23-24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)