Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 15.18.22-23h: उस रात्रि में मुख्य ब्राह्मणगण स्वयं अध्ययन कर रहे थे और अग्निहोत्र की अग्नि जगह-जगह जल रही थी। इस कारण वह रात्रि उनके लिए ब्राह्मी रात्रि के समान आनंदमय हो रही थी। | mahabharat अध्याय 15.18: पाण्डवोंका स्त्रियोंसहित निराश लौटना, कुन्तीसहित गान्धारी और धृतराष्ट्र आदिका मार्गमें गंगातटपर निवास करना । mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उस रात्रि में मुख्य ब्राह्मणगण स्वयं अध्ययन कर रहे थे और अग्निहोत्र की अग्नि जगह-जगह जल रही थी। इस कारण वह रात्रि उनके लिए ब्राह्मी रात्रि के समान आनंदमय हो रही थी।
That night the main Brahmins were studying on their own and the fire of Agnihotra was burning here and there. Due to this the night was becoming blissful for them like the Brahmi night.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥