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mahabharat 15.18.21-22h: विदुर आदि भी राजा से कुछ दूरी पर सोते थे जहाँ से उनकी आवाजें सुनी जा सकती थीं। यज्ञ कराने वाले ब्राह्मण तथा राजा के साथ आने वाले अन्य ब्राह्मण भी उचित स्थानों पर सोते थे।   |   mahabharat अध्याय 15.18: पाण्डवोंका स्त्रियोंसहित निराश लौटना, कुन्तीसहित गान्धारी और धृतराष्ट्र आदिका मार्गमें गंगातटपर निवास करना   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 18: पाण्डवोंका स्त्रियोंसहित निराश लौटना, कुन्तीसहित गान्धारी और धृतराष्ट्र आदिका मार्गमें गंगातटपर निवास करना  »  श्लोक 21-22h
 
 
श्लोक  15.18.21-22h 
तेषां संश्रवणे चापि निषेदुर्विदुरादय:॥ २१॥
याजकाश्च यथोद्देशं द्विजा ये चानुयायिन:।
 
 
अनुवाद
विदुर आदि भी राजा से कुछ दूरी पर सोते थे जहाँ से उनकी आवाजें सुनी जा सकती थीं। यज्ञ कराने वाले ब्राह्मण तथा राजा के साथ आने वाले अन्य ब्राह्मण भी उचित स्थानों पर सोते थे।
 
Vidura and others also slept at a distance from the king from where their voices could be heard. The Brahmins conducting the yajna and the other Brahmins accompanying the king slept at appropriate places. 21 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)