Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 15.18.18-19h: भरतनंदन! तब वृद्ध राजा धृतराष्ट्र ने भी प्रकट होकर अग्नि प्रज्वलित की। त्रिविध अग्नि की पूजा करके तथा उन्हें विधिपूर्वक आहुतियाँ देकर राजा ने सायंकाल सूर्यदेव की पूजा की। 18 1/2॥ | mahabharat अध्याय 15.18: पाण्डवोंका स्त्रियोंसहित निराश लौटना, कुन्तीसहित गान्धारी और धृतराष्ट्र आदिका मार्गमें गंगातटपर निवास करना । mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
प्रादुष्कृताग्निरभवत् स च वृद्धो नराधिप:।
स राजाग्नीन् पर्युपास्य हुत्वा च विधिवत् तदा॥ १८॥
संध्यागतं सहस्रांशुमुपातिष्ठत भारत।
अनुवाद
भरतनंदन! तब वृद्ध राजा धृतराष्ट्र ने भी प्रकट होकर अग्नि प्रज्वलित की। त्रिविध अग्नि की पूजा करके तथा उन्हें विधिपूर्वक आहुतियाँ देकर राजा ने सायंकाल सूर्यदेव की पूजा की। 18 1/2॥
Bharatnandan! Then the old king Dhritarashtra also appeared and lit the fire. After worshiping the threefold fire and making ritual offerings to them, the king worshiped the Sun God in the evening. 18 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥