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mahabharat 15.18.1: वैशम्पायन कहते हैं - हे राजनश्रेष्ठ! कुन्ती के वचन सुनकर निर्दोष पाण्डव अत्यन्त लज्जित हुए और द्रौपदी के साथ वहाँ से लौटने लगे।   |   mahabharat अध्याय 15.18: पाण्डवोंका स्त्रियोंसहित निराश लौटना, कुन्तीसहित गान्धारी और धृतराष्ट्र आदिका मार्गमें गंगातटपर निवास करना   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 18: पाण्डवोंका स्त्रियोंसहित निराश लौटना, कुन्तीसहित गान्धारी और धृतराष्ट्र आदिका मार्गमें गंगातटपर निवास करना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  15.18.1 
वैशम्पायन उवाच
कुन्त्यास्तु वचनं श्रुत्वा पाण्डवा राजसत्तम।
व्रीडिता: संन्यवर्तन्त पाञ्चाल्या सहिताऽनघा:॥ १॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायन कहते हैं - हे राजनश्रेष्ठ! कुन्ती के वचन सुनकर निर्दोष पाण्डव अत्यन्त लज्जित हुए और द्रौपदी के साथ वहाँ से लौटने लगे।
 
Vaishmpayana says - O best of kings! On hearing Kunti's words, the innocent Pandavas felt very ashamed and started returning from there with Draupadi.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)