श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 17: कुन्तीका पाण्डवोंको उनके अनुरोधका उत्तर  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  15.17.9 
इयं च बृहती श्यामा तथात्यायतलोचना।
वृथा सभातले क्लिष्टा मा भूदिति च तत् कृतम्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
मैंने यह सब केवल इसी उद्देश्य से किया कि मेरी पुत्रवधू की यह लम्बी, श्यामवर्णी, बड़े नेत्रों वाली स्त्री फिर भरी सभा में व्यर्थ अपमानित होने का दुःख न सहे॥ 9॥
 
I did all this with the sole purpose that this tall, dark-skinned, large-eyed lady of my daughter-in-law should not again suffer the pain of being needlessly insulted in the gathering full of people.॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)