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श्री महाभारत
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पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व
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अध्याय 17: कुन्तीका पाण्डवोंको उनके अनुरोधका उत्तर
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श्लोक 21
श्लोक
15.17.21
निवर्तस्व कुरुश्रेष्ठ भीमसेनादिभि: सह।
धर्मे ते धीयतां बुद्धिर्मनस्तु महदस्तु च॥ २१॥
अनुवाद
हे कुरुश्रेष्ठ! तुम भीमसेन आदि के साथ लौट जाओ। तुम्हारी बुद्धि धर्म में लगी रहे और तुम्हारा हृदय विशाल (अत्यंत उदार) हो। 21॥
Kurushrestha! You return with Bhimsen etc. May your intellect be engaged in religion and may your heart be large (extremely generous). 21॥
इति श्रीमहाभारते आश्रमवासिके पर्वणि आश्रमवासपर्वणि कुन्तीवाक्ये सप्तदशोऽध्याय:॥ १७॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आश्रमवासिकपर्वके अन्तर्गत आश्रमवासपर्वमें कुन्तीका वाक्यविषयक सत्रहवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १७॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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