श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 17: कुन्तीका पाण्डवोंको उनके अनुरोधका उत्तर  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  15.17.20 
श्वश्रूश्वशुरयो: कृत्वा शुश्रूषां वनवासिनो:।
तपसा शोषयिष्यामि युधिष्ठिर कलेवरम्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर! अब मैं अपने वनवासी सास-ससुर की सेवा करूँगी और तपस्या करके इस शरीर को सुखा दूँगी।
 
Yudhishthira! Now I will serve my forest dwelling mother-in-law and father-in-law and dry up this body by performing austerities.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)